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Thursday, 4 May 2017

घर और वातावरण को प्रदूषण मुक्त बनाये

                  घर और वातावरण को प्रदूषण मुक्त बनाये


प्रदूषण की समस्या आज मानव समाज के सामने खड़ी सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है | पिछले कुछ दशकों में प्रदूषण जिस तेजी से बढ़ा है उसने भविष्य में जीवन के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिन्ह लगाना शुरू कर दिया है | संसार के सारे देश इससे होनेवाली हानियों को लेकर चिंतित है .
आज से कुछ दशकों पहले तक कोई प्रदूषण की समस्या को गंभीरता से नहीं लेता था | प्रकृति से संसाधनों को प्राप्त करना मनुष्य के लिए सामान्य बात थी | उस समय बहुत कम लोग ही यह सोच सके थे कि संसाधनों का अंधाधुंध उपयोग हानि भी पहुँचा सकता है | 
                                                          " यह तेरा घर यह मेरा घर ,
                                                              हमारी हसरतों का घर ,
                                                                 यह घर बहुत हसीन है 
                                                                    यह घर बहुत हसीन है"        
आज प्रदूषण के कारण शहरों की हवा इतनी दूषित हो गई है कि मनुष्य के लिए साँस लेना मुश्किल हो गया है और अगर हमें प्रदूषण कम करना है तो इसकी शुरुआत हमें सबसे पहले अपने घर से करनी होगी ।और बस जरा सी बातों को गौर करके हम अपने सपनो के महल को प्रदूषण मुक्त कर सकते है साथ ही साथ वातावरण को प्रदूषण से मुक्त करवाने मे अपना योगदान दे सकते है ।
घर मै रसोई घर का  स्थान बहुत महत्व पूर्ण है प्रदूषण की सबसे पहली शुरुआत रसोई घर से होती है रसोई मे बटोर ईंधन केरोसिन तेल , एलपीजी ,लकड़ी का चूल्हा या स्टोव का इस्तेमाल होता है और इन सब मे सबसे ज्यादा लोकप्रिय एलपीजी स्टोव है ।कहा जाता है की एलपीजी से प्रदूषण न के बराबर होता है किन्तु यह गलत है क्योंकि गैस ६०० से ८०० डिग्री तापमान पर जलती है
इस से लगभग 300 माईक्रोंन प्रति घनमीटर  नाइट्रोजन डाई ऑक्सीड निकलती है जबकि उतसर्जन ८० माइक्रोन से ज्यादा का नहीं होना चाहिए जबकि बिजली के उपकरणों से विषैली गैस का उत्सर्जन कम होता है ।
किन्तु रसोई घर मे और भी कई बातों का धयान रखना आवश्यक है जिसका सीधा संबध आधुनिकता से है आजकल रसोई मे वाश बेसिन के नीचे ही डस्टबिन बनाया जाता है झूठे बर्तन बेसिन पड़े चींटी तथा कॉकरोच को आमंत्रित करते है तो नीचे पड़ा डस्टबिन से कूड़े की दुर्गन्ध फैलती है खेर इस विषैली गैस को कम करने के लिए विशेषज्ञ द्वारा कुछ सुझाव दिए गए है जो निम्नलिखित है : -

. रसोईघर मे गैस चूल्हा २ या ढाई फुट की उहइ पर ही रखें 
. धुंए को निकलने के लिए चिमनी या एग्जॉस्ट फैन आवश्यक हो 
. कूड़ेदान रसोई घर से बाहर हो 
. बर्तन या तो खाने के बाद ही धो ले अगर ऐसा संभव न हो तो झूटन निकल कर उन्हें पानी से धोकर बेसिन मे      रखें 
.अगर हो सके तो सौर ऊर्जा के कुकर इस्तेमाल करें . खाना हमेशा खड़े होकर बनाये
. रसोई की पूर्ण तया सफाई दिन  मे एक बार जरूर करैं
. मसाले ,दालों ,चावल को महीने मे एक बार धुप जरूर दिखाएँ
. सिंक मे सप्ताह मे एक बार कास्टिक सोडा और एक चमच सिरका डाल कर आधा घंटे के लिए छोड़ दे इस से
  सिंक साफ़ हो जायेगा

 यह तो हो गई रसोई घर की बात चलिए अब घर के बाकी हिस्सों की बात करते हैं घर में कहीं भी ग्रुप में रहने के जाले लगने से दिमाग में एक तरह का तनाव बना रहता है तनाव के साथ-साथ से खांसी या आंखों में जलन की भी समस्या हो सकती है प्लास्टिक के मनमोहन सिंह फोटो सुगंधित मोमबत्तियां रूम फ्रेशनर कपड़ों के प्रेस यह बीमारी के जन्मदाता है बेडरूम को प्रदूषण से मुक्त रखने के लिए आप निम्न कारगर उपाय अपना सकते हैं

. खिड़कियों से कमरे में सुबह कम से कम 1 घंटे तक धुप आनी चाहिए
. कमरे में दिन के समय पर्याप्त रोशनी रहे ताकि सीलन  ना रहे
. अगर संभव हो तो कमरों में समय-समय पर प्राकृतिक पौधों के गमले रखें
. हो सके तो कमरों में नित्य झाड़ू पोछा लगाएं
. अंधेरे स्थानों को और कानों में कपूर की गोलियां रखें. पिसी हल्दी नमक और डेटोल  मिलाकर कर ने पोछा  लगाने से चीटियां कम निकलती है
. कीड़ों से छुटकारा पाने के लिए पोंछे  में तंबाकू का प्रयोग लाभदायक  हो सकता है
. मिट्टी के तेल युक्त पानी का पोछा लगाने से भी चीटियां भाग जाती है
. मच्छर मक्खी भगाने के लिए प्याज के रस पहुंचा लगाने वाले पानी में मिला दे यह भी मच्छर मक्खी को भगाने में
  लाभदायक होता है.


               तो चलिए स्वच्छ भारत का निर्माण स्वच्छ घर के साथ शुरू करते हैं।




Friday, 14 April 2017

*HAPPY POIHLA BAISAKH*


पहला बैसाख बंगाल मे नए साल के रूप मे मनाया जाता है यह हर साल अप्रैल महीने की १४ या १५ तारिक को मनाया जाता है यह पारंपरिक हिंदू बंगाली कैलेंडर में पहला दिन है।सन २०१७ मे यह त्यौहार 15अप्रैल को मनाया जा रहा है
   
 इस दिन लोग अपने घरो को अच्छी तरह से साफ़ करके सजाते है तथा घरो के बीच मे तथा दरवाजो पैर रंगोली भी बनाई जाती है इस दिन सब नए कपडे पहनकर भगवान गणेश लक्ष्मी की पूजा करते हैं।

इस दिन सवेरे से अच्छे पकवान बनाये जाते है यहाँ का प्रसिद्ध नाश्ता लुची , आलूदम , हरे मटर की कचोरी है
दोपहर और रात को चने की दाल , ईलिश मछली ,बिरयानी , चिकेन तथा मटन खाया जाता


 .है

इस दिन सभी बंगाली दुकानदार अपनी दुकानों को सुन्दर से सजाते है और अपने सभी ग्राहकों को निमंत्रण पत्र देकर अपनी दुकान मे आने का आमंत्रण देते है इस दिन सभी दुकानों मे गणेश जी की पूजा की जाती है तथा नए बहीखाते शुरू किया जाते है सभी दुकानदार अपने ग्राहकों को आमंत्रित करके उन्हें नए साल का कैलेंडर तथा मिठाई का डिब्बा दिया जाता है कुछ दुकानदार तो नयी नयी स्किम के साथ अपने ग्राहकों को तोफा भी देते है .



Thursday, 13 April 2017

सब्जीओ मे छिपे बीमारी और वजन घटाने के सटीक उपाय



अदरक गुणों की खान




 अदरक दुनिया का सबसे बहुपयोगी औषधीय गुण वाला पदार्थ है। 100 से ज्यादा बीमारियों में इस का इस्तेमाल १०० से ज्यादा बीमारियोँ के  लिए किया जाता है भारत और चीन में अदरक को एक मसाले और औषधि के रूप में उपजाया और इस्तेमाल किया जाता था। 

भारतीय व्यंजन में अदरक का उपयोग बहुतायत से होता है |
 इसका सेवन सब्जी, चटनी, अचार, सॉस, टॉफी, पेय पदार्थों, बिस्कुट, ब्रेड इत्यादि में स्वाद व सुगंध के लिए किया जाता है |
 इसके  प्रयोग से भोजन न केवल  स्वादिष्ट बनता है बल्कि  सुपाच्य भी  हो जाता है और साथ  ही साथ  स्वास्थ्यवर्धक भी हो जाता है 
अदरक को पेट की समस्याओं, मतली, दस्त, हैजा, दांतदर्द, रक्तस्राव और गठिया के उपचार के लिए एक औषधि के रूप में  इस्तेमाल किया जाता है 

अदरक का इस्तेमाल अधिकतर भोजन के बनाने के दौरान किया जाता है। अक्सर सर्दियों में लोगों को खांसी-जुकाम की परेशानी हो जाती है जिसमें अदरक प्रयोग बेहद ही कारगर माना जाता है। इसके अलावा भी अदरक कई और बीमारियों के लिए भी फ़ायदेमंद मानी गई है।

आजकल लोगो को बिमारियों ने जकड़ रखा है  लोगों में अधिकांश दिक्कत भूख न लग्न , खाना न पचना , पेट में वायु बनना , कब्ज आदि पाचन संबंधित तकलीफे है।  और पेट से ही अधिकांश रोग उत्पन्न होते है।  अदरक पेट की अनेक तकलीफों में रामबाण औषधि है।  

अदरक आँतों की सफाई व् पाचनतंत्र की मजबूती मे बहुत सहायक है अदरक का रस आमाशय के छिद्रों में जमे  कफ को तथा  बड़ी आँतों में जमे आंव को पिंघलाकर बाहर निकल देता है जिससे भोजन का पाचन बढ़िया होता है एवं अरुचि दूर होती है।  

अदरक में जिंजरोल नामक एक बहुत असरदार पदार्थ होता है जो जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द को कम करता है। एक अध्ययन के मुताबिक, अदरक गंभीर और स्थायी इंफ्लामेटरी रोगों के लिए एक असरकारी उपचार है।अदरक माइग्रेन (सिरदर्द) में राहत देती है 

अदरक मधुमेह से होने वाली जटिलताओं से बचाव करती है। अदरक मधुमेह पीड़ित के लिवर, किडनी और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को सुरक्षित कर सकती है। साथ ही वह इस बीमारी के एक आम दुष्प्रभाव मोतियाबिंद का खतरा भी कम करती है।

अदरक कोलेस्ट्रॉल को कम करने, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने, रक्त प्रवाह में सुधार लाने और अवरुद्ध आर्टरियों तथा रक्त के थक्कों से बचाव करने का काम करते हैं। ये सारी चीजें हृदयाघात (हार्ट अटैक) और स्ट्रोक के जोखिम को कम करती हैं।

कुछ ध्यान देने लायक बातें अदरक के बारें मे    :-

१. एक दिन में 4 ग्राम से ज्यादा अदरक नहीं लेनी चाहिए। इसमें खाना पकाने में इस्तेमाल किया जाने वाला अदरक भी शामिल है।

२.दो साल से कम उम्र के बच्चों को अदरक नहीं दी जानी चाहिए।

३.गर्भवती स्त्रियों को प्रतिदिन 1 ग्राम से अधिक नहीं लेना चाहिए।

४.मधुमेह रोगी को अदरक को हमेशा सीमित मात्रा मे  ही खाना चाहिये।


अदरक निम्बू की चाय :-  एक पतीले में साढ़े चार कप पानी उबालें। पानी के उबलने पर 2 इंच अदरक के टुकड़े को 20-25 तुलसी पत्तों के साथ कूट कर  उबलते पानी में डाल दें। 2-3 मिनट तक उबलने दें।
चाय को कप में छान लें और स्वाद के लिए 1 चम्मच नीबू का रस और गुड़ या शक्कर  मिलाएं। गरम-गरम पिएं।

अदरक वजन कम करने मे सहायक :-
 नींबू और अदरक दो ऐसी चीज़ें हैं इससे  आपको न केवल वज़न कम करने संबंधी, बल्कि और भी कई अन्य फायदें  भी निश्चित रूप से होंगे।
गाजर  और थोड़ी सब्ज़ियों को उबाल लें इसमें अदरक को कद्दूकस कर लें साथ ही ऊपर से जीरा पाउडर और नींबू का रस डालें और इसे रात में खाएं।












लौकी या  घिया साधारणतया  भारत के हर घर मे खायी जाने वाली सब्जी है इस से तरह तरह की सब्जी ,कोफ्ते भरवा पराठें तथा मिठाईया भी बनाई जाती है । लौकी न तो सिर्फ खाने मे मजेदार होती है बल्कि इस के ओषधिये गुण भी बहुत होते है लौकी के बीज का तेल कोलेस्‍ट्रॉल को कम करता है तथा हृदय को शक्‍ति देता है। यह रक्‍त की नाडि़यों को भी स्‍वस्‍थ बनाता है। लौकी का उपयोग आंतों की कमजोरी, कब्‍ज, पीलिया, उच्‍च रक्‍तचाप, हृदय रोग, मधुमेह, शरीर में जलन या मानसिक उत्‍तेजना आदि में बहुत उपयोगी है।

तो इसलिए दोस्तों आज हम इस लेख मे लौकी के सिर्फ गुण के बारें मे जानेगे बल्कि इसकी कुछ रेसिपी भी शेयर करेंगे ।
लौकी एक बेल  के रूप मे उगती है जिसमे पानी और पोषक तत्व भरपूर मात्रा मे पाए जाते है यह ऊपर से हरे और हलके पीले रंग की होती है पर छिलने पर इस का गुदा सफ़ेद रंग का होता है इसमें पायें जाने वाले बीज भी सफ़ेद रंग के होते है इसकी खेती नम और आद्र जगहों पर की जाती है जैसे की भारत , श्रीलंका , इंडोनेशिया आदि ।इसमें अनेक विटामिन और खनिज पदार्थो का बाहुल्य होता है इसलिए यह मानव शरीर के लिए बहुत फायदे मंद होती है 

U S के कृषि आंकड़ों के अनुसार १०० ग्राम लौकी मे पानी - ९६ ग्राम , वसा - .०२ग्राम , प्रोटीन - .६२ग्राम , कैल्सियम  - २६ मिलीग्राम ,पोटैसियम - १५० मिलीग्राम तथा इसके अलावा भी बहुत से खनिज पदार्थ और विटामिन पायीं जाते है  . 

लौकी हमारें पेट के लिए बहुत लाभदायी है यह तो बहुत आसानी से हजम होती है बल्कि पाचन क्रिया को भी आसानी से चलाने मे मदद करती है 
लौकी की सब्जी और जूस दोनों के बहुत फायदें है लौकी का एक गिलास जूस न सिर्फ शरीर के तापमान को ठीक रखता है बल्कि शरीर की अतिरिक्त चर्बी को भी घटाता है

लौकी के फायदें

.लौकी को उबाल कर या कम मसालों के साथ सब्जी खाने से न तो सिर्फ तनाव कम होता है बल्कि यह शरीर से  पित्त भी बाहर निकालने मे उपयोगी साबित होती है 

.यह शरीर मे ब्लड शुगर भी नियंत्रित करती है 

.लौकी मे पोटैशियम पाया जाता है जो किडनी संबधी बीमारियों के उपचार मे बहुत मदद करता है 

.यह रक्त चाप ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित करने मे मदद करती है 

.इसमे कोलोस्ट्रोल नहीं होता है तथा इसमें विटामिन और फाइबर बहुत होता है इसलिए यह हृदय रोग मे बहुत  मददगार साबित होती है 



लौकी के जूस के फायदें :_

.हृदय रोग में, विशेषकर भोजन के पश्‍चात एक कप लौकी के रस में थोडी सी काली मिर्च और पुदीना डालकर पीने से हृदय रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।



.लौकी मे ९६% पानी होता है यह लम्बे समय तक भूख को नियंत्रित करता है इसलिए खाली पेट एक गिलास लौकी का जूस पीने से वजन कम होता है 

.रोज एक गिलास लौकी का जूस पीने से मूत्र सम्बन्धी समयसायों मे राहत मिलती है 

.खांसी, टीबी, सीने में जलन आदि में भी लौकी बहुत उपयोगी होती है।

.लौकी के जूस मे फाइबर अधिक मात्रा मे पाया जाता है जिससे पाचन क्रिया सुचारु रूप से चलती है तथा   मेटाबोलिज्म रेट अच्छा होता है 

.इसके नियमित सेवन से एसिडिटी कम होती है 

.लौकी के जूस को आवला के साथ मिलाकर सिर की मालिश करने से रुसी तो गायब होती है साथ ही साथ बाल झड़ने तथा असमय सफ़ेद होने की समस्यों से निजात मिलती है 

तो दोस्तों यह थे लौकी के कुछ खास गुण 

पर दोस्तों इस बात का हमेशा ध्यान रखे की लौकी का जूस पीने  से पहले चख ले की वो कड़वी न हो कड़वी लौकी का सेवन नहीं किया जाता तथा इसके जूस के साथ किसी अन्य फल तथा सब्ज़ी का जूस नहीं पिया जाता









Thursday, 6 April 2017

             नमक के कुछ अचूक उपाय

    नमक का हमारे जीवन में बहुत महत्व है भोजन में अगर नमक ना हो तो भोजन भोजन नहीं लगता है भोजन में अगर नमक ज्यादा हो जाए तो वह बहुत नुकसानदायक होता है और अगर कम हो नुकसान भी होता है और खाने में भी अच्छा नहीं लगता किंतु आज मैं आपको यहां नमक का खाद्य पदार्थ में उपयोग नहीं बताने जा रही हूं बल्कि नमक के ऐसे वास्तु के चमत्कारिक उपाय हैं जिनको जान करके आप हैरान रह जाएंगे
    तो चलिए दोस्तों देखते हैं वह उपाय क्या है  
         नमक कई प्रकार का होता है जैसे कि सेंधा नमक समुद्री नमक सामान्य नमक काला नमक आदि ज्योतिषी शास्त्र के अनुसार नमक को चंद्र और शुक्र का प्रतिनिधि माना जाता है कुछ लोग तो नमक को राहु का प्रतीक भी मानते हैं
    हमारे देश में नमक का गिरना बहुत ही अशुभ माना जाता है कई देशों में तो इसको दुर्भाग्य का प्रतीक माना गया है ज्योतिष शास्त्र नमक गिरने से चंद्र और शुक्र का कमजोर होने का सूचक है

       •भोजन को पकाते समय कभी भी चखना नहीं चाहिए इससे भोजन की पवित्रता नष्ट  हो जाती है और घर मे दरिद्रता का निवास होता है भगवान को नैवेद्ये लगाने के बाद ही भोजन चखे .
       नमक को कभी भी किसी को सीधे हाथ मे देने से बचे . नमक का पैकेट भी किसी को नहीं देना चाहिए ऐसा मiनI जाता है की इससे आपसी सम्बन्ध खराब होते है.
       •गुरुवार को छोड़कर पानी मे थोड़ा सा समुद्री नमक मिला कर घर मे पोछा लगाने से घ की नकराकत्मक ऊर्जा समापत होती है और घर मे बरकत आती है

    .यदि आपका मन बहुत अशांत रहता है या आप बहुत तनावग्रस्त रहते है तो नमक मिले जल से स्नान करे इससे तनाव तो दूर होता है साथ ही साथ थकान भी दूर करता है 
    .गृहक्लेश को दूर करने के लिए सेंधा नमक का एक टुकड़ा शयनकक्ष के एक कोने मे रख दे इस से नकराकत्मक ऊर्जा दूर होती है रोज रोज होने वाला कलह भी शांत होने लगता है यह नमक एक महीने बाद बदल दीजिये .